Saturday, August 15, 2015

How to send auto delete email

Auto delete होने वाला email

आप अपने Gmail का use करके आप खुद ही delete होने वाला email यानी auto delete email send कर सकते हैं।

सबसे पहले,  google के address bar में mail.delicious.com type कीजिए।
आपके Screen पर Dmail लिखा आएगा।
mytips2050.blogspot.com

ये company लोगों को facility provide करती है कि वे self delete यानी खुद ही डिलीट होने वाले email send कर सकते हैं।

After that आपको chrome browser के एक extension को enable करना होगा। आपके स्क्रीन पर 'Get Chrome extension' बटन दिखेगा, उस पर click कर दीजिए। उसके बाद जो screen पे 'add' पर click kijiye।
Extension download होने के बाद Screen पर 'added to chrome' लिखा आएगा ।
उसके बाद ऐप आपसे Permission मांगेगा जिसके लिए आपको अपनी permission  देनी होगी।

जब चाहें तब delete


उसके बाद Gmail account पर login करें।
Email लिखने के लिए जो box स्क्रीन पर आएगा उसमें आपको  Dmail On दिखाई देगा।
आप तय कर सकते हैं कि आपका email एक घंटे, एक दिन या एक हफ्ते में, कब खुद ही delete हो जाए।

mytips2050.blogspot.com


अगर आपने email में कुछ गलत लिख दिया है तो अपने Sent Mail में जाकर 'Revoke email' पर click कर सकते हैं। जिसको आपने email send किया है वो उसी time delete हो जाएगा।

अगर आप किसी को अपने Bank Account details या उस तरह की कोई भी Private Information Send रहे हैं तो ऐसा Email आपकी ज़रुरत के लिए बहुत अच्छा है और ये आपकी बहुत Help करेगा।

अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगी तो Please Comment किजिये और बताईये.

If you have any question please comments we will provide you more information like this.
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Wednesday, August 12, 2015

how to take screenshot in windows 7


1. Press the "Print Screen" (Prt Sc) key on your keyboard. 

This will capture an image of your entire screen and copy it to the clipboard. The dimensions of the image will be the same as your desktop resolution. 

Take a Screenshot in Microsoft Windows Step 1 Version 4.jpg


2.  Open Paint by clicking the Start button , clicking All Programs, clicking Accessories, and then clicking Paint.



 
Take a Screenshot in Microsoft Windows Step 2 Version 3.jpg 
Paste the screenshot. 

 Once you’ve made the screenshot, you will need to paste it to a program in order to see it. The most common way to paste it is into a Paint file. This will allow you to save it as an image file that can be transferred to others. 
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Wednesday, August 5, 2015

How to Reset Android Phone

फैक्ट्री रिसेट
अगर आपका सैमसंग गैलेक्सी एस-6 या एस-6 एज धीमा चल रहा है या फिर आपको उसके परफॉरमेंस में कमी दिख रही है तो उसको रिसेट करना बहुत बढ़िया उपाय है।
फैक्ट्री रिसेट का मतलब होता है फ़ोन को वापस उसी स्थिति में ले जाना, जैसा वो पैकेट से निकालते वक़्त था।
फ़ोन पर जो भी डेटा है, सब कुछ, डिलीट हो जाएगा इसलिए उसे सबसे पहले सेव कर लें।
अगर सभी डेटा सेव कर लिया है तो सॉफ्ट रिसेट करना आसान है।
आपके स्क्रीन पर वार्निंग आएगी कि आपका डेटा मिट जाएगा। एक बार आप अपनी हामी भरेंगे तो फ़ोन फैक्ट्री रिसेट मोड में चला जाएगा।
हार्ड रिसेट
अगर फ़ोन का पासवर्ड आप भूल गए हैं तो हार्ड रिसेट के अलावा को विकल्प नहीं है।
सबसे पहले फ़ोन को ऑफ कीजिए। उसके बाद वॉल्यूम, होम और पावर बटन को एक साथ दबाकर रखिए। कुछ सेकेंड बाद एंड्रॉयड रोबोट आपके स्क्रीन पर आ जाएगा।
थोड़ी देर बाद फ़ोन का बूट मेन्यू इस्तेमाल कर सकेंगे। इसकी मदद से आप फ़ोन को फैक्ट्री रिसेट कर सकते हैं।
चूंकि इससे आपका सारा डेटा मिट जाएगा इसलिए आपको फैक्ट्री रिसेट के लिए हामी भरनी होगी।
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Alert : इस Virus से है आपके Email and Banking Data को खतरा

खतरे में आपके ईमेल और बैंकिग डेटा
साइबर सुरक्षा से जुड़े जानकारों ने इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों को एक खास फिशिंग वायरस से सावधान रहने को कहा है। यह वायरस निजी ईमेल और बैंकिंग से जुड़ी जानकारियां चुरा सकता है।
इस वायरस की पहचान गोलरोटेड’ के रूप में की गई है। यह ट्रॉजन’ श्रेणी का एक खतरनाक कंप्यूटर वायरस है। यह अपने मूल स्वरूप को छिपाने में सक्षम है और आम लोगों को इसमें कुछ भी असामान्य नहीं  लगता है।
तेजी से फैल रहा मालवेयर
कंप्यूटर इमरजेंसी रेस्पांस टीम ऑफ इंडिया (सीईआरटी-इन) ने घरेलू इंटरनेट उपभोक्ताओं को दिए परामर्श में कहा है, ‘ऐसी सूचना है कि मालवेयर का एक नया रूप गोलरोटेड तेजी से फैल रहा है।
इसमें जासूसी करने की पूरी क्षमता है। आम तौर पर ऐसे वायरस फिशिंग ईमेल के अटैचमेंट या बाहरी स्टोरेज डिवाइस के जरिए फैलते हैं। आम तौर पर ऐसे अटैचमेंट माइक्रोसॉफ्ट वर्ड फाइल या जिप फाइल होते हैं।’सीईआरटी-इन ने इंटरनेट उपभोक्ताओं से इस वायरस से सतर्क रहने को कहा है।
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how to create a safe password

मजबूत पासवर्ड
जैसे-जैसे आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इंटरनेट और मोबाइल की अहमियत बढ़ रही है, सुरक्षित पासवर्ड ज़रूरी होता जा रहा है।
अपने पासवर्ड को सुरक्षित रखने के लिए आपको हर कोशिश करनी चाहिए। आइए आपको बताते हैं कुछ उपाय।
एक ही पासवर्ड एक से ज़्यादा वेबसाइट के लिए इस्तेमाल ना करें वरना एक ताला टूटते ही सारी अलमारियाँ खुल जाएँगीं।
भूलकर भी 123456, 0000, 2468 या wxyz जैसे पासवर्ड इस्तेमाल न करें। कोई भी हैकर सबसे पहले ऐसे ही पासवर्ड ट्राई करते हैं, और कई बार सफल भी हो जाते हैं।
पत्नी, बच्चे, अपार्टमेंट, फ़ेवरिट फ़ुटबॉल क्लब वग़ैरह को भी अपना पासवर्ड बनाने से बचें जिन्हें लोग भाँप सकते हैं।
जितना लंबा और स्पेशल कैरेक्टर वाला पासवर्ड होगा, पासवर्ड उतना ही सुरक्षित होता है। पासवर्ड में दो-एक कैरेक्टर अपर केस में भी रखें।
अगर आप अंग्रेज़ी के शब्द और नंबर के अलावा उसमें एक-दो शब्द दूसरी भाषा के डाल देंगे तो पासवर्ड अधिक सुरक्षित हो जाएगा।
पासवर्ड को काग़ज़ पर लिखकर या फ़ोन या कंप्यूटर पर स्टोर मत कीजिए।
ऑनलाइन लॉकर
अगर आप पासवर्ड काग़ज़ पर लिखकर रखते हैं तो उसे पासवर्ड की तरह नहीं बल्कि किसी और शक्ल में लिखकर रखें जिसे सिर्फ़ आप ही समझ सकें।
मिसाल के तौर पर आप उसे उल्टा लिख सकते हैं या उसमें हर दूसरा या तीसरा कैरेक्टर ग़लत लिख सकते हैं, जिसे सही पढ़ने का तरीक़ा सिर्फ़ आपको आता है।
अगर आप चाहें तो अपने पासवर्ड ऑनलाइन लॉकर में भी रख सकते हैं।
LastPass, SplashID Safe, 1Password जैसे सॉफ्टवेयर स्टोर आपके पासवर्ड इनक्रिप्ट करके सुरक्षित रखते हैं। आप वेबसाइट पर अपना मास्टर पासवर्ड दीजिए तो आप लॉग इन कर सकते हैं।
हमेशा की तरह, अपने फ़ोन को कभी भी बिना पासवर्ड के ना रखें। आपके फ़ोन में आपके बारे में बहुत कुछ जानकारी होती है जिस पर किसी की भी नज़र हो सकती है।
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Monday, August 3, 2015

2G Speed ko 3G Speed me बदलने का जुगाड़

आज की कड़ी में जानिए कैसे 'जुगाड़' के ज़रिए भारत में खुद को 'डिजिटल' बना रहे हैं गांव-देहात के लोग।

'मुफ्त का 3-जी'

भारत के दूर दराज़ इलाकों में सबसे बड़ी समस्या है मोबाइल सिग्नल और इंटरनेट स्पीड।

अव्वल तो हर जगह मोबाइल टॉवर नहीं और टॉवर हैं भी तो स्पीड का कोई भरोसा नहीं। ऐसे में पेशे से किसान और तकनीक में रुचि रखने वाले गिरींद्रनाथ झा कैसे एक जुगाड़ के ज़रिए अपनी मुश्किलें आसान करते हैं? जानिए।

गिरींद्र बताते हैं, "जुगाड़ बेहद सीधा सा है। अपने मॉडम को एल्युमीनियम फॉयल में लपेट दीजिए और सिस्टम से कनेक्ट कर सर्च चालू कर दीज़िए। आपका डिवाइस जैसे ही इंटरनेट पकड़ेगा आप पाएंगे कि स्पीड पहले से कहीं बेहतर है।"

गिरींद्र कहते हैं, "कई बार हम इसके लिए दवा की एल्युमीनियम पैकिंग का इस्तेमाल भी करते हैं। जहां टूजी सिग्नल भी उपलब्ध नहीं वहां फॉयल लगाकर सर्फिंग लायक जुगाड़ हो ही जाता है। एक तरह से ये मुफ्त का 3-जी है। ये तरीक़ा आप गांव में कई जगह देखेंगे।"

रेडियो राघव!.......

रेडियो रिपेयरिंग की दुकान चलाने वाले राघव महतो ने साल 2003 में एक ऐसा जुगाड़ किया कि भारतभर में उसकी चर्चा हो गई।

पेशे से मकैनिक राघव ने बैटरी से चलने वाले एक टेप रिकॉर्डर से कुछ तार और एक कॉर्डलैस माइक्रोफोन जोड़कर रेडियो प्रसारण कर दिखाया।

राघव एफएम के नाम से मशहूर हुए रेडियो प्रसारण को 15 किलोमीटर के दायरे में सुना जा सकता था।

इस रेडियो किट को बनाने की लागत आई 50 रुपए।

रेडियो की बेहतर फ्रीक्वेंसी के लिए राघव ने इस्तेमाल किया अपने पड़ोस में बने अस्पताल की इमारत का।

इस इमारत पर लगे बांस के एक डंडे पर बंधे एंटीना ने राघव एफएम को घर-घर पहुंचाया और फरमाइशी गानों से लेकर, एचाईवी के प्रति जागरूकता, खोए बच्चों की जानकारी और मनोरंजन सबकुछ लोगों को परोसा गया।

पांच साल बाद कानूनी कारणों से ये रेडियो स्टेशन तो बंद हो गया, लेकिन राघव का ये जुगाड़ डिजिटल युग में बहुतों के काम आ रहा है।

राघव कहते हैं, "इस तकनीक के आधार पर मुझे कई जगह कम्युनिटी रेडियो शुरू करने का मौका मिला। मैंने बिहार और राजस्थान में कई लोगों के साथ काम किया। अब मैं बेहद कम क़ीमत और सीमित साधनों से पूरा रेडियो स्टेशन खड़ा कर सकता हूं।"

एक अदद बांस...

गांव का पठारी इलाका, नदी किनारे ऊंचा टीला और कुछ न मिले तो घना-ऊंचा पेड़। गांव में मोबाइल सिग्नल पकड़ने का ये जुगाड़ अब लगभग हर किसी की ज़िंदगी का हिस्सा बन गया है।

पूर्णिया के रहने वाले गिरींद्र बताते हैं, "ये एक तरह से गांव के इंटरनेट जोन हैं। हर किसी को पता रहता है कि गांव की वो कौन सी जगह है जहां सिग्नल अच्छा रहता है। किसी खास व्यक्ति से बात करनी हो, कोई ज़रूरी मेल हो, किसी का रिज़ल्ट देखना हो तो हर कोई इन इलाकों की तरफ दौड़ता है।"

सिग्नल से जुड़ा एक दूसरा जुगाड़ जो हर कहीं नज़र आता है वो है बांस पर लगे मॉडम और डॉंगल। जितना ऊंचा बांस उतना बेहतर सिग्नल।

लंबे से लंबे तार इस्तेमाल कर लोग एक अदद बांस के ज़रिए देश-दुनिया से अपना कनेक्शन जोड़ते हैं।

सीजीनेट स्वर ऐप

छत्तीसगढ़ और उसके आसपास के कई इलाकों में मोबाइल फोन के ज़रिए स्थानीय खबरें रिपोर्ट करने वाला पोर्टल है सीजीनेट स्वर।

खबरें जुटाने और प्रकाशित करने का तरीक़ा बेहद आसान है। मोबाइल के ज़रिए खबर, तस्वीरें और आवाज़ रिकॉर्ड कर पोर्टल पर सीधे अपलोड की जा सकती हैं, लेकिन इस सबके के लिए ज़रूरी है इंटरनेट कनेक्शन, जो गांवों में अक्सर मौजूद नहीं होता।

इस समस्या का हल निकालने के लिए सीजीनेट टीम ने एक ऐप बनाया।

सीजीनेट टीम से जुड़ी कृतिका बताती हैं, "सीजीनेट से जुड़े गांव-गांव के जन-पत्रकार फ़ोन पर ही खबरें जुटाते और भेजते हैं। समस्या ये थी कि हर जगह इंटरनेट नहीं था और गांव से निकल कर लगातार सिग्नल पlaर नज़र रखने में काफी समय बर्बाद होता था। मैंने एक ऐप बनाया जिसके ज़रिए आवाज़ें, खबर और तस्वीरें फोन में एक जगह रिकॉर्ड की जा सकें और सिग्नल वाले इलाके में पहुंचते ही वो पोर्टल पर आपने आप अपलोड हो जाएं।"

कुल मिलाकर इस ऐप के ज़रिए फोन रिकॉर्ड का काम करता है और सिग्नल आने पर अपलोडिंग आसान हो जाती है।

Amar ujala

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Facebook के कूल Tricks आप ho jayenge हैरान

फेसबुक के कूल ट्रिक्स
फेसबुक पर आप कुछ नया करने की क्यों नहीं सोचते?
आइए, आपको कुछ तरीके बताते हैं जिससे आपका फेसबुक पेज दूसरों के मुक़ाबले अलग दिखेगा।
अपने स्टेटस मैसेज लिखते समय आप अपना फ़ॉन्ट बदल सकते हैं। इस पेज पर जाकर आपको अपनी पसंद का फ़ॉन्ट चुनना पड़ेगा।
जो भी फ़ॉन्ट आपने पसंद किया है उसमें अपना स्टेटस मैसेज लिख लीजिए। उसको कॉपी करके अपने स्टेटस मैसेज में पेस्ट कर दीजिए।
यहां पर जो आप टाइप कर रहे हैं उसको आप अपने फेसबुक चैट में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
आपके दोस्त ढूंढते रह जाएंगे कि आपने कैसे अपना फ़ॉन्ट बदल दिया है।
अगर आप ये नहीं चाहते हैं कि फेसबुक आपको ट्रैक करे या आपके लोकेशन के बारे में जानकारी रखे तो आप फेसबुक डिसकनेक्ट डाउनलोड कर सकते हैं।
क्रोम और फ़ायरफ़ॉक्स दोनों पर ये काम करता है।
विज्ञापन भी रोकना संभव
फेसबुक आपके लोकेशन पर हर समय नज़र रखता है। कुछ लोगों को ये पसंद नहीं है।
लोकेशन और ब्राउज़िंग हिस्ट्री की मदद से फेसबुक आपको विज्ञापन दिखाता है।
अगर आप अपने फेसबुक पेज पर विज्ञापन से परेशान हैं तो क्रोम एक्सटेंशन की मदद से आप फेसबुक पर उन्हें भी रोक सकते हैं।
फेसबुक एडब्लॉक एक्सटेंशन ख़ास आप जैसे लोगों के लिए बनाया गया है। बस इस एक्सटेंशन को डाउनलोड करके इन्स्टॉल कीजिए।
इन्स्टॉल करने के बाद आप विज्ञापन को रोक सकते हैं और स्क्रीन की दाईं तरफ जो विज्ञापन आपको हमेशा दिखाई देते हैं वो गायब हो जाएंगे।
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Friday, July 31, 2015

Android Awesome Tricks

1. "Never heard of her"
If you need to delete all mentions of ex-partners from your phone, the dictionary can be edited - go to Settings > Language and Keyboard > User Dictionary to clean up your typing history.
2. Speak the Queen's English
If you're fed up of the bizarre accent of the Maps Navigation voice, there's an English variant - go to Menu > Settings > Text to Speech > and tick the box to use your own settings. Now you're able to have an English accent. Much better for navigating the M25.
3. Delete fat Android apps
If you're running low on internal memory space, your apps can be sorted by size - and big ones binned to make space. Head off to Settings > Applications > Manage Applications and press Menu to filter them by memory use.
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Wednesday, July 22, 2015

Internet पर free में सीखें ये 7 चीजें

इंटरनेट पर फ्री में सीखें ये 7 चीजें
फटॉग्रफी
फटॉग्रफी के बेसिक्स सीखने के लिए Photography course साइट पर जाइए। photo.net/learn पर आपको प्रफेशनल्स के ट्यूटोरियल और आर्टिकल मिलेंगे। फटॉग्रफी की टर्मिनॉलजी सीखने के लिए आप Glossary देख सकते हैं।
कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग
जावा स्क्रिप्ट, पीएचपी, जेक्वेरी, पायथन और रूबी सीखने के लिए आप कोड अकैडमी पर जा सकते हैं। यहां आपको सब मिल जाएगा।
नई भाषाएं
इंटरनेट पर आप कई सारी भाषाएं भी सीख सकते हैं। ओपन कल्चर पर शुरू किए गए कोर्स अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, पुर्तगाली या इटैलियन भाषा सीखने के लिए काफी फायदेमंद हैं।
कुकिंग
कुकिंग में सारा खेल छोटी-छोटी टिप्स का होता है जो आपको सिम्पली रेसिपीज़ नाम की साइट से आसानी से मिल जाती हैं। रिलक्टंट गॉरमेट एक दूसरी साइट है जहां से आप कुछ और टेकनीक्स सीख सकते हैं।
आर्टिस्टिक स्किल्स
अगर आपको कला का शौक है तो आप आर्टी फैक्ट्री से कला के गुर सीख सकते हैं। द वर्चुअल इंस्ट्रक्टर पर भी काफी सामग्री मौजूद है जो मददगार साबित हो सकती है। अगर सिर्फ ड्रॉइंग से आगे बढ़ना चाह रहे हैं तो इंस्ट्रक्टेबल्स पर जा सकते हैं।
सेल्फ डिफेंस
यहां मास्टर लेवल की तो नहीं पर आप कुछ बेसिक मार्शल आर्ट और सेल्फ डिफेंस ट्रिक्स सीख सकते हैं। लाइफहैकर की वन पेज गाइड आपको आत्मरक्षा के बेसिक्स सिखाकर आगे की ट्रेनिंग के लिए तैयार कर सकती है।
डांस
ऑनलाइन अपनी डांसिंग स्किल्स पर काम करने के लिए आप सबसे पहले यूट्यूब पर विडियो देखकर प्रैक्टिस करें। उसके बाद डांस टु दिस पर जाकर अलग-अलग डांस फॉर्म्स की डीटेल्स सीखें।
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Laptop की बैटरी लाइफ बढ़ाने के 6 Tips

लैपटॉप की बैटरी लाइफ बढ़ाने के 6 टिप्स
हम में से ज्यादातर लोग अपने लैपटॉप की बैटरी जल्द खत्म हो जाने से परेशान रहते हैं। आइए आपको बताते हैं लैपटॉप की बैटरी लाइफ बढ़ाने के 6 तरीके। आगे क्लिक करिए.
स्मार्टफोन की तरह लैपटॉप की स्क्रीन बैटरी का बड़ा हिस्सा खाती है। ब्राइटनेस लेवल कम से कम रखिए। अगर जरूरत न हो, तो कीबोर्ड की बैकलाइट भी ऑफ कर दीजिए।
यूएसबी पोर्ट में लगे एक्सटर्नल डिवाइसेज़ लैपटॉप की बैटरी से ही पावर लेते हैं। जरूरत न हो, तो इन्हें लैपटॉप से निकाल दीजिए।

लैपटॉप के ज्यादा गर्म होने की वजह से इंटरनल फैन्स को ज्यादा तेज चलता पड़ता है, जिससे बैटरी ज्यादा खर्च होती है। अधिकतर लैपटॉप कूलिंगपैड भी लैपटॉप से ही पावर लेते हैं। लैपटॉप को ठंडी जगह पर रखिए। कोशिश करिए कि लैपटॉप का ज्यादातर हिस्सा (खासकर निचला हिस्सा) हवा के संपर्क में रहे।
स्टैंडबाई की जगह अपने लैपटॉप को हाइबरनेट करिए। हाइबरनेशन में आपका लैपटॉप जस का तस रखते हुए स्लीप मोड में चला जाता है और बैटरी बचाता है।
विंडोज़ पर चलने वाले लैपटॉप में बिल्ट-इन पावर प्लान सेटिंग होती है। आप यहां कई चीजें चुन सकते हैं, जैसे कि डिस्प्ले, हार्ड डिस्क और यूएसबी पावर कब ऑफ हों।
बैटरी से जुड़े कई ऐप्लिकेशन मौजूद हैं। ये बैटरी डिस्चार्ज साइकल बताते हैं। ये सीपीयू और हार्डड्राइव का टेंपरेचर भी बताते हैं, जिससे ओवरहीटिंग का पता चलता है।
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इन वेबसाइट्स की मदद से खुद बनाइए Apps ( how to make Android apps)

अगर आप ऐप्लिकेशन (ऐप्स) डिवेलप करना चाहते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि इसे कैसे किया जाए, तो कुछ वेबसाइट्स इसमें आपकी मदद कर सकती हैं।

Appsbar.com
यह ऐप्स बनाने की शुरुआत करने का अच्छा प्लैटफॉर्म है। यह फ्री साइट है। आप इसमें एचटीएमएल 5 ऐप्लिकेशन बना सकते हैं, जो लगभग हर मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए फिट है। इस साइट पर आप चाहें, तो कितने भी ऐप्लिकेशन बना सकते हैं। इसमें आपको डिवेलपर चार्ज या पब्लिशिंग कॉस्ट नहीं देनी होगी। बिल्ट-इन विजार्ड, ऐप्लिकेशन बनाने में आपकी मदद करेगा। यह ऐप्लिकेशन टाइप चुनने और ऑप्शंस (बैकग्राउंड, कलर, सेक्शन, पेजों की संख्या) में किसी एक को चुनने जितना आसान है। एक बार प्रक्रिया पूरी करने के बाद आप ऐप्लिकेशन सबमिट कर सकते हैं। आपका ऐप्लिकेशन मार्केट क्वॉलिटी स्टैंडर्ड के मुताबिक है और यह अच्छी तरह काम करेगा या नहीं, ऐप्सबार टीम इसकी भी जांच करती है। 

Buzztouch.com
यह साइट ऐप्लिकेशन प्रोसेस के बारे में जानकारी देती है। साइट में आपको ऐप्लिकेशन तैयार करने के फेज़ और मुश्किल चीजों को भी समझाया जाता है। साइट में आप आईओएस और ऐंड्रॉयड ऐप्लिकेशन डिवेलप कर सकते हैं। ऐप्लिकेशन तैयार करने का यह तरीका अडवांस्ड यूजर्स को पसंद आता है। आप ऑनलाइन कंट्रोल पैनल से शुरुआत कर सकते हैं, लेकिन आपको इसके लिए पर्सनल कंप्यूटर पर सोर्स कोड डाउनलोड करना होगा। आईओएस के लिए यूज फ्री सॉफ्टवेयर एक्सकोड या ऐंड्रॉयड के लिए एक्लीपस भी डाउनलोड करना होगा, ताकि ऐप्लिकेशन चल सके। ऐप्लिकेशन तैयार करने के लिए किसी कोडिंग नॉलेज की जरूरत नहीं होगी। यह साइट आपको सभी लिंक भी मुहैया कराएगा।

Andromo.com
यह साइट भी ऐप्लिकेशन तैयार करने में मदद करती है। इसमें विडियो, इंटर-ऐक्टिव मैप्स, फोटो गैलरी, म्यूजिक प्लेयर या आरएसएस न्यूज/फीड जैसे फीचर्स हो सकते हैं। आप इस साइट में जो ऐप्लिकेशन फ्री में तैयार करेंगे, उसमें बैनर ऐड होंगे। वहीं अगर आप ऐप्लिकेशन ऐड फ्री रखना चाहते हैं, तो 99 डॉलर (6,040 रुपए) देने होंगे। अगर आप ऐसा करते हैं, तो ऐप्स को बेच भी सकते हैं।

Monk.ee
इस साइट पर आप सोशल नेटवर्किंग ऐप्लिकेशन तैयार कर सकते हैं और दोस्तों से शेयर कर सकते हैं। फ्री पैकेज में आप फोटो, विडियो शेयरिंग, चैट रूम, ट्विटर, कम्यूनिटी रूम जैसे पहले से तय टेम्पलेट्स पर ही ऐप्लिकेशन तैयार कर सकते हैं।

Appinventor.mit.edu
यह ऐंड्रॉयड प्लैटफार्म के लिए है। आप अपने गूगल अकाउंट का इस्तेमाल करके इसमें लॉग-इन कर सकते हैं। इसमें आपको दूसरी साइट्स की तुलना में ज्यादा फीचर मिलेंगे। आप इस साइट में स्क्रीन ऐड कर सकते हैं, ऐनिमेशन सेट कर सकते हैं और सोशल नेटवर्क कनेक्टिविटी कर सकते हैं।
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Gmail पर गलत ईमेल भेज दिया? ऐसे रोकिए

कितनी ही बार हम ईमेल भेज देते हैं और उसके बाद जाकर याद आता है कि उसमें कुछ गड़बड़ हो गई या किसी की जगह किसी और को ईमेल भेज दिया। ऐसे वक्त ख्याल आता है कि काश ऐसा हो सकता कि हम गलत ईमेल को रोक सकते। जीमेल में आप ऐसा कर सकते हैं। हालांकि, बहुत लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। जीमेल यूजर्स ईमेल भेजने के कुछ समय तक अपने मेल को रोक सकते हैं। बस सेटिंग्स में जाकर इस फीचर को ऐक्टिवेट करने की जरूरत है। आगे बताए गए स्टेप्स को फॉलो करें और गलत मेल भेजे जाने से रोकें...

जीमेल खोलिए। अपनी स्क्रीन में दाईं तरफ ऊपर बने गियर बटन को क्लिक करें। यह गियर बटन आपकी गूगल प्लस प्रोफाइल इमेज के ठीक नीचे दिखाई देता है। इसके ड्रॉपडाउन मेन्यू में से सेटिंग्स चुनिए।
अब आपके सामने कई सारे टैब्ड ऑप्शन होंगे। इनमें से 'Labs' को चुनें और नीचे तक स्क्रॉल करें।
नीचे से तीसरे नंबर पर आपके पास 'Undo Send' का ऑप्शन आएगा। इसे इनेबल कर लें।
दाईं तरफ से स्क्रीन नीचे की ओर स्क्रॉल करें और सेव चेंजेस बटन पर क्लिक करें। लेकिन प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है, बाकी है...

सेव चेंजेस पर क्लिक करने के बाद, आप इनबॉक्स पर फिर से पहुंच जाएंगे। पहला स्टेप दोहराएं और सेटिंग्स के ऑप्शन पर जाएं।

आपके सामने डिफॉल्ट 'जनरल' टैब खुलेगा। टैब में नीचे स्क्रॉल करें और लगभग बीच में आपको 'Undo Send' का ऑप्शन मिलेगा। इसपर टिक मार्क लगा होगा जिससे पता चलता है कि आपका पहला ऑप्शन सेव है। इस टिक मार्क के ठीक नीचे आप खुद चुन सकते हैं कि एक भेजे गए मेल को रोकने के लिए 5 सेकंड से लेकर 30 सेकंड तक कितना समय चाहिए।

एक बार आपने अपना समय चुन लिया हो, तो नीचे की तरफ स्क्रॉल करें और 'सेव चेंजेस' क्लिक करें। अब आप ऊपर तय किए गए समय तक अपना मेल रोक सकते हैं।
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इन वेबसाइट्स की मदद से खुद बनाइए Apps( how to make Android apps)

अगर आप ऐप्लिकेशन (ऐप्स) डिवेलप करना चाहते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि इसे कैसे किया जाए, तो कुछ वेबसाइट्स इसमें आपकी मदद कर सकती हैं।

Appsbar.com
यह ऐप्स बनाने की शुरुआत करने का अच्छा प्लैटफॉर्म है। यह फ्री साइट है। आप इसमें एचटीएमएल 5 ऐप्लिकेशन बना सकते हैं, जो लगभग हर मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए फिट है। इस साइट पर आप चाहें, तो कितने भी ऐप्लिकेशन बना सकते हैं। इसमें आपको डिवेलपर चार्ज या पब्लिशिंग कॉस्ट नहीं देनी होगी। बिल्ट-इन विजार्ड, ऐप्लिकेशन बनाने में आपकी मदद करेगा। यह ऐप्लिकेशन टाइप चुनने और ऑप्शंस (बैकग्राउंड, कलर, सेक्शन, पेजों की संख्या) में किसी एक को चुनने जितना आसान है। एक बार प्रक्रिया पूरी करने के बाद आप ऐप्लिकेशन सबमिट कर सकते हैं। आपका ऐप्लिकेशन मार्केट क्वॉलिटी स्टैंडर्ड के मुताबिक है और यह अच्छी तरह काम करेगा या नहीं, ऐप्सबार टीम इसकी भी जांच करती है।

Buzztouch.com
यह साइट ऐप्लिकेशन प्रोसेस के बारे में जानकारी देती है। साइट में आपको ऐप्लिकेशन तैयार करने के फेज़ और मुश्किल चीजों को भी समझाया जाता है। साइट में आप आईओएस और ऐंड्रॉयड ऐप्लिकेशन डिवेलप कर सकते हैं। ऐप्लिकेशन तैयार करने का यह तरीका अडवांस्ड यूजर्स को पसंद आता है। आप ऑनलाइन कंट्रोल पैनल से शुरुआत कर सकते हैं, लेकिन आपको इसके लिए पर्सनल कंप्यूटर पर सोर्स कोड डाउनलोड करना होगा। आईओएस के लिए यूज फ्री सॉफ्टवेयर एक्सकोड या ऐंड्रॉयड के लिए एक्लीपस भी डाउनलोड करना होगा, ताकि ऐप्लिकेशन चल सके। ऐप्लिकेशन तैयार करने के लिए किसी कोडिंग नॉलेज की जरूरत नहीं होगी। यह साइट आपको सभी लिंक भी मुहैया कराएगा।

Andromo.com
यह साइट भी ऐप्लिकेशन तैयार करने में मदद करती है। इसमें विडियो, इंटर-ऐक्टिव मैप्स, फोटो गैलरी, म्यूजिक प्लेयर या आरएसएस न्यूज/फीड जैसे फीचर्स हो सकते हैं। आप इस साइट में जो ऐप्लिकेशन फ्री में तैयार करेंगे, उसमें बैनर ऐड होंगे। वहीं अगर आप ऐप्लिकेशन ऐड फ्री रखना चाहते हैं, तो 99 डॉलर (6,040 रुपए) देने होंगे। अगर आप ऐसा करते हैं, तो ऐप्स को बेच भी सकते हैं।

Monk.ee
इस साइट पर आप सोशल नेटवर्किंग ऐप्लिकेशन तैयार कर सकते हैं और दोस्तों से शेयर कर सकते हैं। फ्री पैकेज में आप फोटो, विडियो शेयरिंग, चैट रूम, ट्विटर, कम्यूनिटी रूम जैसे पहले से तय टेम्पलेट्स पर ही ऐप्लिकेशन तैयार कर सकते हैं।

Appinventor.mit.edu
यह ऐंड्रॉयड प्लैटफार्म के लिए है। आप अपने गूगल अकाउंट का इस्तेमाल करके इसमें लॉग-इन कर सकते हैं। इसमें आपको दूसरी साइट्स की तुलना में ज्यादा फीचर मिलेंगे। आप इस साइट में स्क्रीन ऐड कर सकते हैं, ऐनिमेशन सेट कर सकते हैं और सोशल नेटवर्क कनेक्टिविटी कर सकते हैं।

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इंटरनेट पर कैसे share करें large files

अधिकतर लोगों को इंटरनेट पर बड़ी फाइल शेयर करना मुश्किल काम लगता है। फिल्म और बड़े डाक्युमेंट्स जैसी हेवी फाइल इंटरनेट पर शेयर करने में दिक्कत आती है। इस प्रॉब्लम से पार पाने के कुछ आसान तरीके बता रहे हैं करण बजाज। आगे क्लिक करिए...

Bayfiles.net
इस साइट पर आपकी अपलोडेड फाइल्स कितनी बार भी डाउनलोड करने की सुविधा है। इस पर 5GB तक की फाइल शेयर की जा सकती है। 30 दिन की इनऐक्टिविटी के बाद साइट आपकी फाइल हटा देती है।

Filedropper.com
इसे इस्तेमाल करना बहुत आसान है। इस साइट पर आपको किसी साइन-अप की जरूरत नहीं पड़ती और आप 5GB तक की फाइल्स अपलोड कर सकते हैं।

Slingfile.com
इस साइट में बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते लेकिन इसकी सर्विस आपको 50GB तक की फ्री अपलोडिंग की सुविधा देती है। इससे आप एक बार में कई फाइल्स भी अपलोड कर सकते हैं। फाइल्स 180 दिन की इनएक्टिविटी के बाद ही साइट से डिलीट होती हैं। अपलोडेड फाइल्स को जितना चाहें उतनी बार डाउनलोड करने की सुविधा भी है।

Yourfilelink.com
इस साइट के लिए भी साइन-अप करने की जरूरत नहीं पड़ती। आप 5 GB की फाइल्स अनलिमिचेड डाउनलोड की सुविधा के साथ शेयर कर सकते हैं। वैसे यह किसी फाइल को 15 दिन के बाद डिलीट कर देता है।

Filewire.me
यह वेबसाइट फाइल्स स्टोर करने के लिए ट्रांसफर करने की सुविधा देती है। आप बिना रजिस्टर किए 5GB जबकि फ्री अकांउट से 30 GB तक फाइल शेयर कर सकते हैं। फाइल्स 24 घंटे में ही हटा दी जाती हैं। आपको एक अलग आईडी दी जाती है जिसके जरिए दूसरे शेयर की गई फाइल्स डाउनलोड कर सकते हैं।

www.pipe.com
नाम के नए फ्री ऐप के जरिए आप अपने ऑनलाइन दोस्त से 1GB तक की फाइल शेयर कर सकते हैं। साथ ही ऑफलाइन दोस्तों के लिए आप 100MB तक की फाइल पाइप के क्लाउड स्टोरेज में सेव कर सकते हैं।

स्काइप के जरिए
स्काइप मेसेंजर पर बातचीत और वीडियो चैटिंग के अलावा इंस्टैंट मेसेज के जरिए फाइल्स भी शेयर की जा सकती हैं। इसके जरिए एक बार में 100MB तक की फाइल भेजी जा सकती है।

पर्सनल क्लाउड स्पेस
आप गूगल ड्राइव, ड्रॉपबॉक्स, बॉक्सडॉटनेट या स्काईड्राइव जैसी क्लाउड स्टोरेड साइट्स के जरिए भी चीजें शेयर कर सकते हैं। इसके लिए बस आपको फाइल या फोल्डर सेलेक्ट कर उसका ईमेल पता बताना होगा जिससे आप ये फाइल्स शेयर करना चाहते हैं।

नेटवर्क ड्राइव
WD मायबुक लाइव और सीगेट गोफ्लेक्स होम जैसे नेटवर्क ड्राइव डेटा बैकअप के साथ-साथ इंटरनेट पर फाइल्स ऐक्सेस करने के भी अच्छे ऑप्शन हैं। इसके लिए आप जिन फाइल्स को शेयर करना चाहते हैं, उनकी सेटिंग्स के जरिए उन्हें इंटरनेट पर ऐक्सेसिबल कर दें। फिर इन फाइल्स के लिंक और लॉग-इन डिटेल्स शेयर कर सकते हैं।
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इन Tools के जरिए Computer से मैनेज करें Android डिवाइस

ऐंड्रॉयड स्मार्टफोन पर पड़े इतने सारे कॉन्टैक्ट, मेसेज और फाइलों को मैनेज करना काफी मुश्किल हो जाता है। जानिए कुछ फ्री टूल्स के बारे में, जिनके जरिए ऐंड्रॉयड को मैनेज करना बाएं हाथ का खेल बन जाएगा।
अगर अपने ऐंड्रॉयड डिवाइस को पीसी के जरिए मैनेज करना हो, तो एयरड्रॉयड-2 एक बेहतरीन ऐप है। भले ही आपका पीसी और स्मार्टफोन एक ही वाई-फाई नेटवर्क पर न हों, फिर भी आप ब्राउडर विंडो के जरिए अपने फोन को ऐक्सेस कर सकते हैं।
इसके जरिए आप आप SMS पढ़ और सेंड कर सकते हैं, इनकमिंग कॉल्स को रिजेक्ट कर सकते हैं, कॉन्टैक्ट्स को मैनेज कर सकते हैं, फाइल्स ट्रांसफर कर सकते हैं, ऐप इंस्टॉल और रिमूव कर सकते हैं, रिंगटोन बना सकते हैं और यहां तक कि अपने फोन को ढूंढ भी सकते हैं।
यही नहीं, आप अपने फोन के फ्रंट या रियर कैमरा की मदद से दूर बैठे लाइव फीड भी देख सकते हैं। इसके लिए न तो आपको अपने पीसी पर कोई ड्राइवर इंस्टॉल करने होंगे और न ही केबल कनेक्ट करनी होगी। 

2. Mobogenie
मोबोजीन सिर्फ विंडोज के लिए ही उपलब्ध है। इसका यूजर इंटरफेस काफी अच्छा है और आइकन भी बड़े हैं। इससे आप अपने फोन की स्टोरेज को ऐक्सेस करके मीडिया और फाइल्स को मैनेज कर सकते हैं। कॉन्टैक्टस और एसएमएस को भी मैनेज किया जा सकता है। आप कई सारे लोगों को फोन से पीसी के जरिए ही मेसेज भेज सकते हैं।
ऐप मैनेजर से आप से अपने डेस्कटॉप इंटरनेट कनेक्शन से गूगल प्ले से ऐप डाउनलोज करके फोन पर इंस्टॉल कर सकते हैं। इससे मोबाइल का डेटा चार्ज कम होगा। आप अपने पूरे ऐंड्रॉयड फोन का बैकअप पीसी पर ले सकते हैं, जिससे सॉफ्टवेयर में कोई दिक्कत होने या नए डिवाइस पर स्विच करने में मदद मिलती है। 

3. Moborobo
मोबोरोबो ऐंड्रॉयड और iOS दोनों तरह के डिवाइसेज को मैनेज कर सकता है। इसके जरिए आप आप अपने ऐंड्रॉयड डिवाइस में मौजूद कुल कॉन्टैक्ट्स, SMS और ऐप के नंबर देख सकते हैं। साथ ही मेन विंडो में फोन पर मौजूद मल्टि-मीडिया फाइल्स को भी देखा जा सकता है। बाकी बची बैटरी और स्टोरेज के बारे में भी इंडिकेशन मिल जाती है। आप पीसी के जरिए ही अपने डिवाइस का स्क्रीनशॉट लेकर उसे डेस्कटॉप पर सेव कर सकते हैं।
इसके जरिए आप SMS रीड और सेंड कर सकते हैं, ऐप रिमूव और इंस्टॉल कर सकते हैं और एक साथ कई डिवाइसेज के बीच डेटा ट्रांसफर कर सकते हैं। बैकअप फीचर भी है। 

4. MOBILedit! Lite
इस टूल का फ्री (लाइट) वर्ज़न लिमिटेड है और इसमें कुछ बेसिक फंक्शन ही परफॉर्म किए जा सकते हैं। आप केबल, वाई-फाई या ब्लूटूथ के जरिए अपने फोन को कनेक्ट कर सकते हैं।
इस मैनेजर से आप अपने डिवाइस की डीटेल्स देख सकते हैं, SMS रीड और सेंड कर सकते हैं, अपडेट इंस्टॉल कर सकते हैं और फाइल्स ट्रांस्फर कर सकते हैं।
पेड वर्जन से आप मोबाइल से डुप्लिकेट कॉन्टैक्ट्स हटा सकते हैं। यह अपने आप ही फोन का बैकअप भी ले लेता है। 

5. SnapPea
यह उन चुनिंदा मैनेजर्स में से है, जो विंडोज़ और मैक दोनों को सपोर्ट करता है। इसके कुछ ब्राउजर बेस्ड वर्जन भी हैं, जो AirDroid की तरह काम करते हैं।
आप इस ऐप को अपने फोन में इंस्टॉल करके वाई-फाई के जरिए अपने कंप्यूटर की ब्राउजर विंडो से फोन को ऐक्सेस कर सकते हैं। इससे आप ऐप इंस्टॉल और रिमूव कर सकते हैं, कॉन्टैक्ट एडिट कर सकते हैं, मेसेज सेंड/रिसीव कर सकते हैं और फाइल ट्रांसफर कर सकते हैं।
इसमें आईट्यून लाइब्रेरी से म्यूजिक इंपोर्ट करके सिंक करने की सुविधा भी मिलती है।

6. QtADB
यह ओपन सोर्स ऐंड्रॉयड मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर विंडोज, मैक और लिनक्स के लिए उपलब्ध है। इसका इंटरफेस बेहद बेसिक है, लेकिन इसके फीचर दूसरे टूल्स जैसे ही हैं।
कॉन्टैक्ट मैनेजमेंट, SMS रीड/सेंड करना, स्क्रीनशॉल टेना, डेटा ट्रांसफर और ऐप मैनेड करने जैसे कई कामों को अंजाम दिया जा सकता है।
जो बात इसे बाकियों से अलग करती है, वो यह कि इसके जरिए आप कनेक्ट किए गए ऐंड्रॉयड की रिकवरी के लिए कस्टम रोम को वाइव, रूट और लोड कर सकते हैं।
7. pocket.do
अगर आपको लगता है कि AirDroid थोड़ा मुश्किल है तो इसे यूज कीजिए।
यह भी ब्राउजर विंडो पर काम करता है और इसके लिए फोन और पीसी के एक ही वाई-फाई नेटवर्क पर होने की जरूरत नहीं है। इसमें गूगल या फेसबुक अकाउंट्स के जरिए डिवाइस को कनेक्ट करने का ऑप्शन भी है। या फिर ब्राउजर में दिए गए QR कोड को भी यूज किया जा सकता है, मगर इसके लिए अलग से बारकोड स्कैनर ऐप इंस्टॉल करना पड़ेगा।
एक बार कनेक्ट हो जाने के बाद आप कॉन्टैक्ट मैनेज कर सककते हैं, SMS सेंड/रिसीव कर सकते हैं और फोटो ट्रांसफर कर सककते हैं। इससे आप मैप में अपने डिवाइस को लोकेट कर सकते हैं और लॉक भी कर सकते हैं। मोबाइल के रियर कैमरा से लाइव फीड भी देखी जा सकती है। 

9. Teamviewer
पॉप्युलर रिमोट सपोर्ट सॉफ्टवेयर टीमव्यूअर सैमसंग ऐंड्रॉयड फोन्स को भी सपोर्ट करकता है।
इसके लिए सबसे पहले पीसी में टीम व्यूअर सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करना होगा। ऐंड्रॉइड डिवाइस में टीम व्यूअर क्विक सपोर्ट ऐप (TeamViewer quick support)से आप अपने सैमसंग डिवाइस को रिमोटली ऐक्सेस कर सकते हैं।
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कैसे करें DND में रजिस्ट्रेशन (How to register in DND in Hindi)

टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के अनुसार कोई भी मोबाइल या लैंडलाइन फोन इस्तेमाल करने वाला सब्स्क्राइबर अनचाहे कॉल और मेसेज को रोक सकता है।
इस तरह की परेशानी से बचने के लिए ट्राई ने दो तरह की ब्लॉक कैटिगरी बनाई हैं।
फुल ब्लॉक कैटिगरी
इस कैटिगरी में वे लोग अपना नंबर रजिस्टर करवा सकते हैं, जो किसी भी तरह की कमर्शल कॉल रिसीव नहीं करना चाहते। वह 1909 पर कॉल या 'START 0' मेसेज कर सकते हैं।
अगर आपको किसी खास कैटिगरी के मेसेज और कॉल चाहिए, तो वह इस ऑप्शन को चुन सकता है। फिलहाल ऐसी 7 कैटिगरी हैं।
1. बैंकिंग, इंश्योरेंस,फाइनैंशल प्रॉडक्ट्स और क्रेडिट कार्ड
2. रीयल एस्टेट
3. एजुकेशन
4. हेल्थ
5. कस्टमर गुड्स और ऑटोमोबाइल
6. कम्यूनिकेशन, ब्रॉडकास्टिंग, मनोरंजन और आईटी
7. टूरिज्म
आपको जिन कैटिगरी से जुड़े कमर्शल कॉल और मेसेज चाहिए, तो START के बाद उस कैटिगरी का नंबर डाल कर 1909 पर मेसेज करें। जैसे अगर आपको हेल्थ और ऑटोमोबाइल पर सर्विस चाहिए तो लिखें 'START 45' और 1909 पर भेजें। अब आपको इनके अलावा दूसरी तरह के एसएमएस नहीं आएंगे। रजिस्ट्रेशन सफल होने पर 24 घंटे के अंदर आपको एक यूनीक रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाएगा। इसके प्रभावी होने में 7 दिन का समय लगता है। अपने नंबर का स्टेटस http://www.nccptrai.gov.in/nccpregistry/search.misc पर जाकर देखें।
कैसे करें शिकायत
रजिस्टर करने के 7 दिन बाद भी अगर कोई कमर्शल कॉल या मेसेज आता है, तो 1909 पर इसकी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
कॉल करके शिकायत करें
आप 1909 पर कॉल करें और वॉइस रिस्पॉन्स सिस्टम को फॉलो करके शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा आप चाहें, तो कस्टमर एग्जेक्युटिव से बात करके भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
मेसेज करके शिकायत करें
1909 पर एक सेट फॉर्मैट में मेसेज करके भी आप शिकायत दर्ज करा सकते हैं। फॉर्मैट इस तरह से है:
"COMP TEL NO XXXXXXXXXX, dd/mm/yy, Time hh:mm"
इसमें XXXXXXXXXX का मतलब वह नंबर है, जहां से इस तरह के कॉल आ रहे हैं। आपको कंप्लेंट दर्ज हो जाने की जानकारी एक यूनीक कंप्लेंट नंबर के मेसेज से दे दी जाएगी। शिकायत के 7 दिन के अंदर आपको शिकायत पर कार्रवाई की सूचना दी जाएगी।
डीएनडी कैसे बन जाता है नॉन डीएनडी
- आप जानकारी देने वाली किसी वेबसाइट से मदद मांगते हैं, तो आपको एसएमएस पर जानकारी लेने से पहले अपने नंबर को नॉन डीएनडी में कन्वर्ट कराना पड़ता है।
- कई वेबसाइट सब्स्क्राइब करते ही आपका नंबर नॉन डीएनडी में खुद ही कन्वर्ट कर देती हैं।
- अगर आपने किसी वेबसाइट के जरिए जानकारी लेने या कुछ खरीदने की कोशिश की है, तो वह आपका नंबर वेंडरों से बिना पूछे भी इन कंपनियों को दे देती हैं।
- अपना नंबर पोस्टपेड से प्रीपेड और प्रीपेड से पोस्टपेड कनवर्ट कराने पर भी आपको दोबारा डीएनडी में रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है।
ऐसे सुधरेंगे हालात
ट्राई के पूर्व प्रमुख नृपेंद मिश्रा ने कुछ सुझाव दिए, जो इस समस्या से निजात दिलाने में मददगार साबित हो सकते हैं:
- ट्राई लगातार ऐसे नंबरों का सर्वे-सैंपलिंग करे और समय-समय पर टेलिकॉम कंपनियों को ऐक्शन लेने के लिए कहे।
- ऐक्शन लेने की समय सीमा निर्धारित की जाए।
- कंपनियों पर भी ऐक्शन न लेने पर पेनल्टी के अलावा और ऐक्शन लेने के विकल्पों पर विचार किया जाए।
- प्रमोशनल मेसेज करवाने वाले कस्टमर यानी थर्ड पार्टी पर भी जिम्मेदारी डालने के लीगल विकल्पों के बारे में सोचा जाए।
- टेलिकॉम कंपनियों को अपनी तरफ से भी कैंपेन चलाने चाहिए, जिससे लोग जागरुक होकर अधिक शिकायत करें।
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ऐसे मात दें Cyber जासूसों को

हाल में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व कर्मचारी एडवर्ड स्नोडेन ने रहस्य से पर्दा उठाया था कि अमेरिकी नैशनल सिक्युरिटी एजेंसी (एनएसए) दुनिया भर के (भारतीयों समेत) आम लोगों की इंटरनेट ऐक्टिविटी पर नजर रखे हुए है। उनके ईमेल, चैट, स्काइप पर हुई बातचीत, इंटरनेट डेटा स्टोरेज वेबसाइटों पर रखी फाइलों और उनके पर्सनल डेटा को ऐक्सेस किया जा रहा है। हमारी सरकार भी सेंट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम (सीएमएस) के नाम से अपने नागरिकों की इंटरनेट गतिविधियों की निगरानी का सिस्टम लाने जा रही है। और तो और बहुत से हैकर्स और क्रिमिनल्स की नजरें भी आपके संदेशों पर हो सकती हैं। कोई नहीं चाहेगा कि इंटरनेट ब्राउजर खोलने के बाद वह जो कुछ भी करता है, उस पर कोई लगातार नजर रखे। इस सबके बावजूद इस तरह की जासूसी से बचना और इंटरनेट पर अपनी प्राइवेसी को बनाए रखना असंभव नहीं है। जिन कंपनियों के डेटा की मॉनिटरिंग की जा रही है, उनसे दूर रहकर या फिर वेब पर अपने संदेशों को एनक्रिप्ट (गुप्त भाषा में बदल कर) करके आप खुफिया आंख से बच सकते हैं। हम आपको बता रहे हैं कि कैसे आप डट कर साइबर जासूसी का मुकाबला कर सकते हैं:

ईमेल सर्विस बदलें
1. अगर आपके लिए जीमेल, आउटलुक.कॉम (पहले लाइव और हॉटमेल) और याहूमेल की ईमेल सेवा की तुलना में अपनी प्राइवेसी अधिक जरूरी है, तो ऐसी ईमेल सेवाओं को अपना लीजिए जो आपकी गतिविधियों, लोकेशन आदि को नोट नही करतीं। नीचे दी गईं साइट्स आपके संदेशों को इस तरह से भेजती हैं कि वे जासूसों से सुरक्षित रहें। hushmail तो आपके मेसेज को एनक्रिप्ट (उलटी- पुलटी मशीनी भाषा में बदलकर) करके भेजती है।
http://www.gmx.com/
https://mail.riseup.net/
http://www.hushmail.com/

ईमेल एनक्रिप्ट करें
अगर आप जीमेल, आउटलुक.कॉम और याहूमेल के साथ ही बने रहना चाहते हैं, तो अपने ईमेल्स को एनक्रिप्ट करके भेजना और रिसीव करना शुरू करें। कम से कम ऐसे संदेशों को जरूर एनक्रिप्ट करें, जो गोपनीय हैं और आपके लिए बहुत जरूरी हैं।

डाउनलोड करें: NBT का ऐंड्रॉयड ऐप

कैसे करें एनक्रिप्शन
एनक्रिप्शन के लिए ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। एनक्रिप्शन साइट्स पर दिए गए बॉक्स में अपना संदेश डालें और उसे एनक्रिप्ट करने के लिए अपनी पसंद का पासवर्ड बताकर बटन दबाएं। संदेश के एनक्रिप्ट हो जाने पर उसे कॉपी कर सामान्य ईमेल से भेज दें। बाद में रिसीव करने वाले को वही पासवर्ड बता दें। वह मेसेज को एनक्रिप्शन वाली वेबसाइट पर पेस्ट करने के बाद डिक्रिप्ट करके पढ़ सकेगा। कुछ एनक्रिप्शन साइट्स हैं -

http://infoencrypt.com/
http://www.everpassword.com/aes-encryptor
https://encipher.it/

गुमनाम ईमेल
कोई सीक्रेट मेल भेजने के लिए अपनी ईमेल सर्विस के बजाय ऐसी ईमेल सर्विस का इस्तेमाल करें, जो ईमेल अकाउंट बनाए बिना ही संदेश भेजने की सुविधा देती है। यहां आपकी पहचान, लोकेशन आदि दर्ज नहीं होती, इसलिए प्राइवेसी बनी रहती है। अपनी इंटरनेट सिक्युरिटी को और पुख्ता करना चाहते हैं, तो पहले अपने मेसेज को ऊपर बताए वेब पेजों पर एनक्रिप्ट कर लें और फिर इन ईमेल सेवाओं के जरिए भेजें। ऐसी कुछ ईमेल सर्विसेज़:

http://anonymouse.org/
https://www.silentsender.com/
http://www.5ymail.com/

कुछ देर का ईमेल
कुछ वेबसाइट्स आपको अस्थायी ईमेल अकाउंट की सुविधा देती हैं, जो कुछ देर के लिए एक्टिव रहता है। जहां आने के बाद आप 10 मिनट तक जितने चाहें मेसेज भेजें और उसके बाद अकाउंट डिलीट हो जाता है। जब आप खुद ही नहीं जानते कि आपका अकाउंट कहां गया, तो किसी और के लिए उसे खोजना नामुमकिन है। ऐसी ही एक ईमेल सर्विस है http://10minutemail.com

पर्सनल सर्वर
यदि आप कोई इंस्टिट्यूट चलाते हैं, जिसमें कई लोगों के ईमेल अकाउंट मौजूद हैं तो फ्री वेब मेल सर्विस के बजाय पर्सनल ईमेल सर्वर भी स्थापित कर सकते हैं, ताकि आप के सभी ईमेल मेसेज हिफाजत में रहें।

अगर न अपना सकें ये ऑप्शंस
यदि आप इनमें से किसी ऑप्शन को आजमाने की स्थिति में नहीं हैं, तो कम से कम अपने ईमेल मेसेज्स को जीमेल और याहूमेल के सर्वर पर स्टोर रखने के बजाय कंप्यूटर में डाउनलोड करना शुरू करें। यह पूरी तरह सुरक्षित तो नहीं है, लेकिन एकदम असुरक्षित होने से बेहतर है। ईमेल को डाउनलोड करने के लिए ईमेल क्लाइंट सॉफ्टवेयर का प्रयोग करें, जैसे विंडोज लाइव मेल, आउटलुक, मोजिला थंडरबर्ड आदि। ये सभी फ्री डाउनलोड किए जा सकते हैं।

क्लाउड भी नहीं है सेफ
आज-कल बहुत से लोग अपनी निजी फाइलों को माइक्रोसॉफ्ट स्काईड्राइव, गूगल ड्राइव, ड्रॉप बॉक्स आदि क्लाउड स्टोरेज वेबसाइटों पर सहेज कर रखते हैं। लेकिन यहां रखी पर्सनल और गोपनीय सामग्री तक सिर्फ उन्हीं की पहुंच हो, ऐसा नहीं है। एनएसए जैसी एजेंसियां जब चाहें इन्हें खंगाल सकती हैं। इन पर सहेजी जानेवाली सामग्री को एनक्रिप्ट करने के लिए http://www.cloudfogger.com/ से फ्री सॉफ्टवेयर इन्स्टॉल कर सकते हैं। आपके कंप्यूटर में इन्स्टॉल होने के बाद यह हर उस फाइल को 256 बिट एईएस पद्धति से एनक्रिप्ट कर देगा, जिसे आप क्लाउड स्टोरेज वेबसाइटों पर रखना चाहते हैं। इसी की मदद से उन्हें वापस डिक्रिप्ट करके आप इस्तेमाल कर सकते हैं। वैसे ही, जैसे जिप और अनजिप का प्रयोग करते हैं। ऐसी फाइलों को कोई अन्य शख्स डाउनलोड कर भी ले, तो पढ़ नहीं सकता।

इन्स्टैंट मेसेजिंग और विडियो चैट
गूगल चैट, स्काइप और गूगल टॉक जैसे सॉफ्टवेयर और सर्विसेज़ में प्राइवेसी सुरक्षित नहीं है, तो कोई बात नहीं। पियर-टु-पियर एनक्रिप्टेड विडियो कॉल्स के लिए स्काइप के बजाए जिट्सी (https://jitsi.org/) को डाउनलोड कर इस्तेमाल किया जा सकता है, जो किसी भी तरह की ताक-झांक के खतरे से फ्री है।

इसी तरह इन्स्टैंट मेसेजिंग के लिए एकदम सुरक्षित, फ्री चैट क्लाइंट पिडगिन (http://pidgin.im/) का इस्तेमाल करें जो सेफ तो है ही, ढेरों चैट सॉफ्टवेयर्स (गूगल टॉक, आइसीक्यू, एमएसएन, याहू आदि) का प्रयोग करने वाले यूजर्स के साथ चैट करने की सुविधा भी देता है। ऐसे ही कुछ और सॉफ्टवेयर हैं- http://bitwiseim.com/ और http://projectscim.com/

हमेशा रहें अलर्ट
- अपने कंप्यूटर में अच्छा ऐंटि-वायरस और ऐंटि-स्पाईवेयर सॉफ्टवेयर (जैसे नॉर्टन, मैकेफी, कैस्परस्की, ट्रेंड माइक्रो आदि) इन्स्टॉल करके रखें और अपडेट करते रहें। फ्री उपलब्ध अवास्ट (http://www.avast.com)भी बहुत अच्छा ऐंटि-वायरस है।

- इंटरनेट यूज़ करते समय ब्राउजर में मौजूद प्राइवेसी सुविधा का प्रयोग करें। प्राइवेट ब्राउजिंग से विजिट किए गए इंटरनेट ठिकानों का ब्योरा कंप्यूटर में सेव नहीं किया होता।
क्रोम में Tools->New Incognito Window
इंटरनेट एक्स्प्लोरर में Safety->In-Private Browsing
फायरफॉक्स ब्राउज़र में ​File>New Private Window

-स्थायी रूप से ब्राउजर हिस्ट्री डिलीट करने का ऑप्शन भी अच्छा है। उन्हीं वेबसाइट्स का इस्तेमाल करें जो सिक्योर सर्वर लेयर (SOL) का प्रयोग करती हैं। इनमें डेटा फ्लो एनक्रिप्टेड तरीके से होता है। ऐसी वेबसाइट्स के वेब एड्रेस की शुरुआत https:// से होती है, http:// से नहीं, जो सामान्य वेबसाइट्स पर इस्तेमाल होता है।

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Tuesday, July 21, 2015

Turbo c++ Tricks and tips

Turbo c++ Tricks

We can't paste content directly into C++ and C by coping and pasting it. So here's a easy trick to do so WITHOUT ANY SOFTWARE. Just follow few easy steps:

1>>Write anything in Turboc and save it(take any name say mixworld) in Bin Folder.

2>>Copy the content you wanna paste in program.

3>>Then go to the folder 'Bin' as in this folder that file is saved.

4>>There are two to three files of that name in that folder.

5>>Checkout the properties of those files and find out the file having type 'C++ source'.

6>>Now just open it with notepad(Right click on it->Open with->Choose Notepad) and paste your content there and save it.

Now open that file in Turboc and you will see the copied content in the program..BiNg0..!!.. ;)
3 Tricks to Run Turbo C++ Fullscreen In Windows 7

When you try to run turbo c++ IDE on latest version of windows like Windows7 or Vista, you may get the error message that 'The system does not support full screen mode. Choose close to terminate the application.'
The problem is that turbo C is very old DOS program. It's better to move on to an up to date compiler like visual c++ Express which is free and you certainly would have a better experience.

Anyway if you are up with turbo c++ and used to it, I have 3 tricks to run it full screen on windows7 and vista. The tricks can be simply classified based on which works on all versions of windows7 and one which only works under Windows 7 Enterprise, Windows 7 Professional, and Windows 7 Ultimate.

Technique 1

Log on to windows7 in safe mode. In safe mode the application running capabilities of an operating system is low and this mode is used as trouble fixing for OS. But this method is much simpler and you only need to log on to safe mode by pressing F8 on start up.
By summarizing the steps:
Install turbo C++
Start windows7 in safe mode.
Execute turbo C++
Technique 2

By Disabling your graphics adapter.  This trick is done by just uninstalling the graphics driver. To do that
Right click on My Computer, click Properties
Select Device manager->Display Adapters
Identify the display adapter of your computer, and uninstall.
You should try this trick only if you do not use your computer for Graphic related operations like playing multimedia games.By this trick graphics would look vulgar but you can run C++ in full screen.

Technique 3

By using DOSBox software. It is an  open source DOS emulator for BeOS, Linux, Mac OS X, OS/2, and Windows. This tool is primarily intended to play DOS games on windows7 but here we can use it run turbo C++ in Full screen mode.

Download DOSBox frome here. (for windows)
Install and run the DOSBox.
Now a command prompt type window will appear. We need to mount TC folder.
              Just type “mount c: c:/tc” and press enter.
Assumed that Turbo C++ is installed in C drive and TC folders located at C:\TC
You may get a message that 'Drive C is mounted as local directory C:/TC\'
Change the directory to C/BIN/tc.exe. To do that, please follow the steps as shown in the below screen shot.

Now the Turbo C++ will open in DOSBox. Press ALT+ENTER  to toggle between full screen and mini screen.

By applying the above 3 tricks, you can run C compiler on full screen mode in windows 7.

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